"पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने डीएसपी गुरमुख सिंह चीमा को एनडीपीएस केस में आरोपमुक्त किया"

"पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने डीएसपी गुरमुख सिंह चीमा को एनडीपीएस केस में आरोपमुक्त किया"

The Punjab and Haryana High Court discharged DSP

The Punjab and Haryana High Court discharged DSP

चंडीगढ़। The Punjab and Haryana High Court discharged DSP, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के मामले में फंसे एक डीएसपी (डिटेक्टिव) गुरमुख सिंह चीमा को बड़ी राहत देते हुए उन्हें आरोपमुक्त कर दिया है।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड में अधिकारी के खिलाफ कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं है और ऐसे में मुकदमे को जारी रखना न्यायिक समय तथा सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा होता।

जस्टिस एनएस शेखावत की अदालत ने लुधियाना की विशेष अदालत द्वारा 27 जनवरी और 10 फरवरी 2023 को पारित उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके तहत डीएसपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 58 के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था तथा उनकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी।

याचिकाकर्ता गुरमुख सिंह चीमा ने हाई कोर्ट को बताया कि मामला एक आरोपी के घर और ट्यूबवेल कक्ष से 720 ग्राम अफीम की कथित बरामदगी से जुड़ा था। उनका कहना था कि वे केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मौके पर पहुंचे थे। वहां पहुंचने पर उन्हें परिस्थितियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्होंने जांच अधिकारी को तत्काल आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने की सलाह दी थी।

डीएसपी ने अदालत को यह भी बताया कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कई बार जांच हुई और हर बार उन्हें निर्दोष पाया गया। उन्होंने न तो तलाशी ली, न मादक पदार्थ बरामद किया, न जांच की और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार किया। उनका घटनास्थल से संबंध केवल इतना था कि वे एक बार वहां पहुंचे और जांच अधिकारी को जल्दबाजी में गिरफ्तारी न करने को कहा।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि अफीम बरामदगी की कार्रवाई पूरी तरह जांच अधिकारी द्वारा की गई थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी के पिता ने उस समय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दी थी। जांच में यह निष्कर्ष निकला था कि कुछ व्यक्तियों के कहने पर आरोपी को फंसाने के लिए मादक पदार्थ रखे गए थे। इसके बावजूद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रही और बाद में उसे दोषी भी ठहराया गया।

फैसले में कहा गया कि बाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर जांच अधिकारी और डीएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन दोबारा जांच के बाद पुलिस ने डीएसपी के पक्ष में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इसी मामले में मुकदमे का सामना कर रहे जांच अधिकारी और अन्य सह-आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं।

जस्टिस शेखावत ने कहा कि जब याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दोष सिद्ध करने वाला साक्ष्य मौजूद नहीं है और पुलिस भी उनके पक्ष में कैंसिलेशन रिपोर्ट दे चुकी है, तब विशेष अदालत को उनकी डिस्चार्ज याचिका स्वीकार कर लेनी चाहिए थी। अदालत ने अंतत पुनरीक्षण याचिका मंजूर करते हुए विशेष अदालत के आदेश रद्द कर दिए और डीएसपी गुरमुख सिंह चीमा को आरोपमुक्त करने का आदेश जारी किया।